प्रमाण 2.0 में विशेषज्ञ सत्र, मॉक क्राइम सीन, मूट कोर्ट, एआई सत्र और स्टार्टअप पिचिंग ने बढ़ाया विद्यार्थियों का ज्ञान

(उत्तर केसरी संवाददाता)
मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू) के कॉलेज ऑफ एलाइड एंड हेल्थकेयर साइंसेज के फॉरेंसिक साइंस विभाग की ओर से आयोजित पांच दिवसीय ‘प्रमाण 2.0-फॉरेंसिक वीक 2026’ में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता और नवाचार का अनूठा संगम देखने को मिला। ‘नेक्स्ट-जनरेशन फॉरेंसिक्स-फ्रॉम एविडेंस टू इन्नोवेशन रू शेपिंग द फ्यूचर ऑफ फॉरेंसिक्स’ थीम पर आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने फॉरेंसिक विज्ञान के व्यावहारिक और आधुनिक पहलुओं को विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से समझा।
फॉरेंसिक वीक के दौरान विद्यार्थियों ने मॉक क्राइम सीन के माध्यम से साक्ष्य जुटाने, उनके संरक्षण और वैज्ञानिक तरीके से सर्च तकनीकों की बारीकियां सीखीं। टीएमयू के लॉ कॉलेज के सहयोग से आयोजित मूट कोर्ट में विद्यार्थियों ने न्यायालय के समक्ष फॉरेंसिक साक्ष्यों को प्रस्तुत करने तथा उनकी न्यायिक प्रक्रिया को समझा। वहीं, ‘थिंक साक्ष्य’ की कार्यशाला और ‘प्रमाण पिच टैंक’ में विद्यार्थियों ने फॉरेंसिक उपकरणों और डिजिटल समाधानों से जुड़े स्टार्टअप विचार प्रस्तुत किए।
विशेषज्ञों ने साझा की आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों की जानकारी
एम्स, नई दिल्ली की डॉ. अनुपमा रैना ने ‘फॉरेंसिक डिजास्टर मैनेजमेंट इंक्लूडिंग डीएनए फिंगरप्रिंटिंग’ विषय पर विशेषज्ञ सत्र लिया। उन्होंने आपदा प्रबंधन, आपदा पीड़ितों की पहचान और डीएनए फिंगरप्रिंटिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी विद्यार्थियों के साथ साझा की। केस डिस्कशन के माध्यम से विद्यार्थियों ने जाना कि बड़े स्तर की आपदाओं में फॉरेंसिक विज्ञान किस प्रकार पीड़ितों की पहचान को वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है।
बीडीए टेक्नोलॉजी, नोएडा के सह-संस्थापक अम्बेश तिवारी ने ‘रोल ऑफ एआई इन फॉरेंसिक साइंस’ विषय पर ऑनलाइन सत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विश्लेषण और पैटर्न पहचान की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने फॉरेंसिक विज्ञान में आधुनिक तकनीकों की संभावनाओं और उनके उपयोग के विभिन्न पहलुओं से विद्यार्थियों को अवगत कराया।
वहीं, ‘थिंक साक्ष्य’ की ऑपरेशनल हेड चारु सकलानी ने फॉरेंसिक साइंस में उद्यमिता और नवाचार के अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों को फॉरेंसिक क्षेत्र में नए विचारों को तकनीकी समाधान और उद्यम के रूप में विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
रचनात्मक गतिविधियों में भी दिखी विद्यार्थियों की प्रतिभा
फॉरेंसिक विज्ञान के गंभीर विषयों को रचनात्मक एवं रोचक स्वरूप देने के लिए फॉरेंसिक पिक्शनरी, ट्रेजर हंट, अपराध आधारित लघु फिल्म, फॉरेंसिक यूनिफॉर्म, फॉरेंसिक प्लेज और साक्ष्य आधारित रील जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें विद्यार्थियों ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आलोचनात्मक चिंतन और नवाचार का प्रदर्शन किया।
बाल शोषण और आपराधिक व्यवहार पर आधारित स्किट, फॉरेंसिक रैंप वॉक (अल्टर ईगो) तथा साइको-डांस की प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम की शुरुआत फॉरेंसिक मैराथन और ‘द फॉरेंसिक प्लेज’ प्रतियोगिता के साथ हुई।
विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता
फॉरेंसिक प्लेज में बीएससी पंचम सेमेस्टर की रियू, रुचि और अनन्या विजेता रहीं। फॉरेंसिक आइडेंटिटी में अलीशा और आरिश ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। ट्रेजर हंट में एमएससी द्वितीय सेमेस्टर की मानसी के नेतृत्व वाली टीम-2 विजेता रही।
फॉरेंसिक पिक्शनरी में लामिया, आरिश, अक्षिता, खुशी, अलीशा और भूमिका अव्वल रहे। प्रमाण पिच टैंक में ए. श्वेता-क्रिप्टिक्स और ए. निकुंज-प्यूरियन विजेता रहे। शॉर्ट फिल्म प्रतियोगिता में टीम ब्रिस्टल्स एवं द मिडनाइट मास्टर्स ने खिताब अपने नाम किया। रील प्रतियोगिता में मयंक ने प्रथम, लामिया ने द्वितीय और कनक ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की रही उल्लेखनीय सहभागिता
प्रमाण 2.0 में लॉ कॉलेज के डीन प्रो. हरबंश दीक्षित, चीफ प्रॉक्टर प्रो. सुशील कुमार, सीटीएलडी के निदेशक प्रो. पंकज कुमार सिंह, फॉरेंसिक मेडिसिन के एचओडी प्रो. प्रमोद डोडे, एसोसिएट डीन एकेडमिक्स डॉ. अमित कंसल, असिस्टेंट डायरेक्टर एकेडमिक्स डॉ. नेहा आनंद, फाइन आर्ट्स के प्रिंसिपल रविन्द्र देव, आईआईसी कोऑर्डिनेटर प्रदीप कुमार वर्मा और इंक्यूबेशन सेंटर के डिप्टी मैनेजर दीपक जैन आदि मौजूद रहे।
फॉरेंसिक वीक में कॉलेज ऑफ एलाइड
एंड हेल्थकेयर साइंसेज के प्राचार्य प्रो. नवनीत कुमार, एमएलटी की एचओडी प्रो. रुचि कांत, फॉरेंसिक विभाग के एचओडी रवि कुमार, ऑप्टोमेट्री के एचओडी डॉ. राकेश कुमार यादव, एमआरआईटी के एचओडी अमित बिष्ट, डॉ. योगेश कुमार, आकाश कुमार, अंशिका श्रीवास्तव, सौम्या त्रिपाठी, जयश्री, अजय प्रताप सिंह, मानसी चौहान, रिया चौहान और क्यूरी सिंह सहित फॉरेंसिक विभाग के शिक्षक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
फॉरेंसिक वीक के माध्यम से विद्यार्थियों को फॉरेंसिक विज्ञान की पारंपरिक अवधारणाओं के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक, न्यायिक प्रक्रिया, आपदा पीड़ितों की पहचान और उद्यमिता जैसे आधुनिक क्षेत्रों से जोड़ने का अवसर मिला। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में साक्ष्य आधारित सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार की भावना को प्रोत्साहित किया।






