मुरादाबाद (उत्तर केसरी संवाददाता)। एक्सपोर्ट वाइस एसोसिएशन (ईवीए) में आंतरिक विवाद गहराता नजर आ रहा है। संगठन के सदस्य एवं एलाईट कॉरपोरेशन के स्वामी मजहर नूर ने ईवीए के अध्यक्ष अनूप शंखधार और महासचिव विशाल अग्रवाल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए संगठन में पारदर्शिता और समान भागीदारी की मांग की है।
मजहर नूर ने मीडिया को दिए अपने बयान में आरोप लगाया कि ईवीए के अध्यक्ष और महासचिव स्वयं निर्यातकों के प्रमुख संगठन एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स (ईपीसीएच) समेत अन्य बैठकों में भाग लेते हैं, जबकि अन्य सदस्यों को बैठकों में शामिल होने से कथित रूप से रोका जाता है।
उन्होंने कहा कि संगठन से जुड़े निर्यातकों और सदस्यों को भी अपनी समस्याएं तथा उद्योग से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दे ईपीसीएच के मंच पर रखने का अवसर मिलना चाहिए। उनका आरोप है कि सदस्यों की भागीदारी सीमित किए जाने से संगठन के भीतर असंतोष बढ़ रहा है।
व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाने पर उठाए सवाल
मजहर नूर ने बताया कि उन्होंने ईपीसीएच की बैठकों में सदस्यों की भागीदारी से संबंधित मुद्दा ईवीए के व्हाट्सऐप ग्रुप में उठाया था। इसके बाद उन्हें कथित रूप से संगठन के व्हाट्सऐप ग्रुप से हटा दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी बात रखने के कारण उन्हें संगठन से भी निष्कासित कर दिया गया। मजहर नूर ने इस कार्रवाई को संगठनात्मक लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत बताते हुए कहा कि किसी सदस्य द्वारा सवाल उठाने या अपनी राय रखने पर उसे मंच से हटाना उचित नहीं है।
सदस्यता शुल्क वापस न मिलने का भी आरोप
निर्यातक मजहर नूर ने दावा किया कि वह ईवीए की सदस्यता लेने के लिए पांच हजार रुपये का शुल्क जमा कर संगठन से जुड़े थे। उनका कहना है कि संगठन से हटाए जाने के बाद न तो उन्हें दोबारा संगठन के ग्रुप से जोड़ा गया और न ही उनके द्वारा जमा किया गया सदस्यता शुल्क वापस किया गया। उन्होंने इस पूरे मामले में संगठन के पदाधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने तथा सदस्यता और निष्कासन से संबंधित नियमों को सार्वजनिक करने की मांग की है।
संगठन में पारदर्शिता और समान भागीदारी की मांग
मजहर नूर का कहना है कि ईवीए का गठन निर्यातकों के हितों और उनकी समस्याओं को संगठित रूप से उठाने के उद्देश्य से किया गया था। ऐसे में संगठन की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और सभी सदस्यों को समान अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों, बैठकों और निर्यातकों के हितों से संबंधित मुद्दों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि सदस्यों की भागीदारी सीमित की जाती है तो इससे संगठन के मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकते हैं।
गठन से लेकर कार्यप्रणाली तक उठाए सवाल
मजहर नूर ने ईवीए के गठन की प्रक्रिया और वर्तमान कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन अपने मूल उद्देश्यों से भटक रहा है और कुछ पदाधिकारियों के निर्णयों के कारण सदस्यों के हित प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि संगठन को व्यक्तिगत मतभेदों और विवादों से ऊपर उठकर निर्यातकों की समस्याओं, उद्योग की चुनौतियों और व्यापारिक हितों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
मजहर नूर ने मांग की कि संगठन की कार्यप्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और सदस्यों को अपनी बात रखने तथा संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर भागीदारी का उचित अवसर दिया जाए।
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक ईवीए के चेयरमैन और महासचिव की ओर से मजहर नूर द्वारा लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।












