Home उत्तराखंड गंगोत्री धाम से स्वच्छता, सेवा और तीर्थों की दिव्यता बनाए रखने का...

गंगोत्री धाम से स्वच्छता, सेवा और तीर्थों की दिव्यता बनाए रखने का संदेश

0
20

(उत्तर केसरी संवाददाता)
गंगोत्री। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानन्द सरस्वती एवं डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती ने गंगोत्री धाम के दर्शन कर मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती के सान्निध्य एवं नेतृत्व में परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों, आचार्यों और परमार्थ परिवार के सदस्यों ने गंगोत्री धाम में स्वच्छता अभियान चलाया। इस दौरान तीर्थों की पवित्रता, पर्यावरण संरक्षण और सेवा का संदेश दिया गया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि गंगोत्री केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक चेतना का जीवंत केंद्र है। मां गंगा भारतीय संस्कृति, श्रद्धा और आस्था की अविरल धारा हैं। इसलिए गंगा तट की स्वच्छता केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं, बल्कि हमारी आस्था के प्रति भी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने स्वच्छता को जीवन का अभिन्न संस्कार माना था। गांधी जयंती पर हिमालय और मां गंगा की धरती पर स्वच्छता सेवा उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

उन्होंने गंगोत्री से सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति का आह्वान करते हुए कहा कि यह केवल किसी अभियान का लक्ष्य नहीं, बल्कि तीर्थों की पवित्रता की रक्षा का संकल्प होना चाहिए। उन्होंने प्लास्टिक मुक्त गंगोत्री, प्लास्टिक मुक्त उत्तराखंड और देश के सभी तीर्थों का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तीर्थों में दर्शन के साथ उनकी सेवा का संकल्प भी लेना चाहिए। सच्ची श्रद्धा वही है जो दर्शन को दायित्व, आस्था को आचरण और पूजा को प्रकृति संरक्षण से जोड़ दे।

इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सत्य, अहिंसा, सादगी, साहस, कर्तव्य और राष्ट्रसेवा के उनके आदर्शों को स्मरण किया गया।

परमार्थ निकेतन की ओर से संकट की घड़ी में साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देने वाले फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए भी प्रार्थना की गई। परमार्थ गंगा आरती उन्हें समर्पित की गई। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि हिमालय धैर्य, गंगा प्रवाह और हनुमान जी साहस का संदेश देते हैं, जबकि भारतीय परंपरा सेवा को जीवन का धर्म बनाना सिखाती है।

इस अवसर पर ‘एक पेड़ मां के नाम-एक पेड़ धरती मां के नाम’ का संकल्प भी लिया गया। गंगोत्री की पावन धरती से लोगों से आह्वान किया गया कि तीर्थ केवल घूमने और दर्शन करने के स्थान नहीं, बल्कि उनकी पवित्रता और प्रकृति की रक्षा की जिम्मेदारी भी हैं। स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सेवा को जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here