
(उत्तर केसरी संवाददाता)
मुरादाबाद। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दलों में सरगर्मी तेज होती जा रही है। जहां भाजपा चुनावी तैयारियों में आगे दिखाई दे रही है, वहीं उसकी प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी भी इस मर्तबा जनपद मुरादाबाद की सभी छहों विधानसभा सीटें जीतने को लेकर सियासी दांवपेंच बनाने में जुटी दिखाई दे रही है। गौरतलब है कि यहां की छह सीटों में से सपा का इस समय पांच सीटों पर कब्जा है।
सबसे रोचक चुनाव मुरादाबाद सदर सीट को लेकर बनता दिखाई दे रहा है। भाजपा दो बार के विधायक को ही इस बार भी चुनावी मैदान में उतारेगी इसकी संभावना प्रबल हैं, तो समाजवादी पार्टी इस सीट को भी अपने पाले में करने के लिए नया प्रयोग कर सकती है, जिसमें इस मुस्लिम बाहुल्य सीट पर भारी तादाद के वोट बैंक माने जाने वाले सैनी समाज के किसी नेता को नगर विधानसभा सीट पर उतारा जाना लगभग तय माना जा रहा है। अगर ऐसा होता है तो फिर इस सीट पर कांटे की टक्कर दिखाई देगी।
विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। भाजपा जहां मजबूत संगठन के भरोसे जनपद की छह में से तीन पर जीत की रणनीति पर आगे बढ़ती दिख रही है, तो वहीं समाजवादी पार्टी भी सभी छह सीटों पर अपनी जीत के ताने-बाने बुनने में जुटी है। लगभग पौने पांच लाख मतदाताओं वाली शहर विधानसभा पर काफी समय से भाजपा का कब्जा है। पिछले चुनाव में भाजपा बहुत ही मामूली अंतर से यह सीट जीतने में कामयाब हो पाई थी, यही कारण है कि इस बार समाजवादी पार्टी इस सीट को हर हाल में अपने पाले में करने के जतन में प्रयत्नशील है।
जानकारों का कहना है कि इस सीट पर सैनी मतदाताओं की बहुतायतों के मद्देनजर समाजवादी पार्टी इस सीट पर सैनी समाज को आगे कर कब्जा कर सकती है। राजनीतिक सूत्र बताते हैं कि इस सीट पर लगभग पैंतीस से चालीस हजार के बीच सैनी मतदाता हैं, जमीनीस्तर पर देखा जाए तो समाजवादी पार्टी में काफी हिंदू नेता टिकट के लिए ख्वाहिशमंद हैं, जिसकी चर्चा भी जोरों पर है, पार्टी के एक सैनी नेता की सक्रियता और प्रचार प्रसार को देखते हुए टिकट में उसका नंबर अव्वल दिखाई दे रहा है, वहीं मुस्लिम नेताओं की भी एक लंबी चौड़ी फेहरिस्त इस सीट पर टिकट के दावेदारों की है, उनमें एक पूर्व विधायक, पूर्व महानगर अध्यक्ष और दर्जा राज्यमंत्री रहे एक नेता का नाम भी सुर्खियों में है।
बहरहाल इस सीट पर समाजवादी पार्टी ने अगर सैनी प्रत्याशी को मैदान में उतारा, तो भाजपा को जीत के लिए कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि सपा से सैनी प्रत्याशी होने पर भाजपा का सैनी वोटर खिसकने का खतरा बना रहेगा, चूंकि सैनी समाज का वोट लामबंद होकर एकमुश्त पड़ता दिखाई देता रहा है, इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता।





