दसलक्षण महापर्व के आठवें दिन विधि-विधान से हुई पूजा-अर्चना

(उत्तर केसरी संवाददाता)
मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में चल रहे दसलक्षण महापर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म श्रद्धा, भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक भावनाओं के साथ मनाया गया। जिनालय में सुबह से ही पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान श्रीजी का अभिषेक और शांतिधारा कर धर्मलाभ अर्जित किया। आरती, भक्ति और पूजा-अर्चना से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
स्वर्ण कलशों से श्रीजी का अभिषेक करने का पुण्य लाभ सौभाग्य हर्षित, अरिहंत, अर्चित और अविनाश जैन ने प्राप्त किया। इसके बाद स्वर्ण झारी से शांतिधारा का पुण्यार्जन आदर्श, कुशाग्र, सोमिल, आर्यन, प्रथम, आदि और पारस जैन ने किया। रजत झारी से शांतिधारा करते हुए अतिशय, सुहित, ऋषभ, अनंत, नमो और आर्जव जैन ने पुण्य अर्जित किया। पूर्वी, स्वीकृति, अंशी, काव्य, शिवली, तान्या, पारुल, मुस्कान और वंशिका जैन को अष्ट कुमारी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
छात्रा लावण्या जैन ने तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन किया। पंडित ऋषभ शास्त्री के मुखारविंद से देव-शास्त्र-गुरु पूजा, भगवान महावीर पूजा, सोलह कारण पूजा और दसलक्षण पूजा विधि-विधानपूर्वक संपन्न कराई गई।
चार प्रकार के दान को बताया उत्तम त्याग का आधार
उत्तम त्याग धर्म पर प्रवचन करते हुए पंडित ऋषभ शास्त्री ने कहा कि दान चार प्रकार का होता है—आहार दान, औषधि दान, अभय दान और ज्ञान दान। इनका लाभ मुनि, आर्यिका, श्रावक और श्राविका संघ को पहुंचाना चाहिए। उन्होंने कहा कि धन बिजली की चमक के समान नाशवान है, इसलिए मनुष्य जीवन में अर्जित धन का सदुपयोग दान और परोपकार के कार्यों में किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि निश्चय नय से राग-द्वेष का त्याग और व्यवहार नय से चार प्रकार के दान को उत्तम त्याग कहा गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार कुएं का पानी उपयोग में न आने पर सड़ जाता है, उसी प्रकार संचित धन का श्रेष्ठ कार्यों में उपयोग न होने पर उसका महत्व समाप्त हो जाता है। त्याग की भावना व्यक्ति को संग्रह से ऊपर उठाकर परोपकार और आत्मकल्याण की ओर ले जाती है।
आयोजन समितियों के सदस्यों का हुआ सम्मान

दसलक्षण महापर्व के आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाने वाली विभिन्न समितियों के सदस्यों को भी सम्मानित किया गया। दिव्यघोष समिति, बोली समिति, पारणा व्यवस्था, उपहार वितरण और अनुशासन समिति से जुड़े सदस्यों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। सम्मान से आयोजन में सहयोग करने वाले सदस्यों में उत्साह और ऊर्जा का संचार हुआ।
संध्या काल में फिजियोथेरेपी कॉलेज की हेड प्रो. शिवानी एम. कौल और फैकल्टी सदस्यों के नेतृत्व में जिनालय से श्रीजी की आरती को दिव्यघोष के साथ रिद्धि-सिद्धि भवन लाया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से भगवान की आरती की।
जैन महाभारत की नाट्य प्रस्तुति ने मोक्ष का संदेश दिया

दसलक्षण महापर्व के अवसर पर टीएमयू ऑडिटोरियम में फिजियोथेरेपी विभाग के विद्यार्थियों ने जैन महाभारत पर आधारित नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से धर्म, वैराग्य और मोक्ष का संदेश दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। विद्यार्थियों ने अभिनय, संवाद और नृत्य के माध्यम से महाभारत से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को जीवंत किया।
प्रस्तुति में शांतनु-भीष्म प्रसंग, पांडु का राज्याभिषेक, धृतराष्ट्र-कर्ण प्रसंग, पांडु-कुंती-माद्री, वनवास और पांडु के वैराग्य को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। नेमिनाथ प्रसंग, कृष्ण-बलराम संवाद, द्रोणाचार्य का प्रशिक्षण तथा कर्ण-अर्जुन संवाद भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहे।
नाट्य प्रस्तुति में भीम-दुर्योधन युद्ध, लाक्षागृह, स्वयंवर, इंद्रप्रस्थ और युधिष्ठिर के राज्याभिषेक के दृश्यों ने दर्शकों को बांधे रखा। चौसर, द्रौपदी प्रसंग, कृष्ण का शांति प्रस्ताव और महाभारत युद्ध के बाद भीष्म के निधन तथा पांडवों के राज्यारोहण को भी प्रभावी संवादों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।
नाटक के अंतिम चरण में द्वारका का अंत, श्रीकृष्ण का देहावसान, पांडवों की दीक्षा और मोक्ष नृत्य प्रस्तुत किया गया। मोक्ष नृत्य के साथ नाट्य प्रस्तुति का भावपूर्ण समापन हुआ। प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि सांसारिक उपलब्धियों के साथ आत्मकल्याण, वैराग्य और मोक्ष की दिशा में बढ़ना भी जीवन का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को दी विदाई

कार्यक्रम के दौरान फिजियोथेरेपी कॉलेज की हेड प्रो. शिवानी एम. कौल की उपस्थिति में अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को विदाई दी गई। सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर टीएमयू के कुलाधिपति सुरेश जैन, फर्स्ट लेडी वीना जैन, ग्रुप वाइस चेयरमैन मनीष जैन, ऋचा जैन, एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन, जाह्नवी जैन, नंदनी जैन, कुलपति प्रो. वीके जैन सहित विश्वविद्यालय परिवार के विभिन्न संकायों के शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।






